धनुर्धर जाति

Dhanuk.Com में आपका स्वागत है।

धानुक भारत, नेपाल, बांग्लादेश और पाकिस्तान में पाया जाने वाला एक समुदाय है। भारत में, धानुक समुदाय बिहार, झारखंड, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, पंजाब, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और अन्य राज्यों में भी पाया जाता है। नेपाल में, वे तराई के जिलों - सप्तरी, सिराहा और धनुषा - में बसे हुए हैं। वे मूल निवासी जनजाति के लोग हैं। पूर्वी तराई के धानुक लोगों को 'मंडल' के नाम से भी जाना जाता है, लेकिन यह उपनाम बिहार के ज़्यादातर धानुक इस्तेमाल करते हैं। 'जसवार कुर्मी' भी धानुक समुदाय का ही एक हिस्सा हैं। धानुक हिंदू धर्म को मानते हैं और हिंदी की विभिन्न बोलियाँ बोलते हैं।

परंपरा के अनुसार, धानुक समुदाय का नाम संस्कृत शब्द ‘धनुष्क’ से पड़ा है, जिसका अर्थ है ‘धनुर्धर’ (तीरंदाज़)।

धानुक (धनाक, धान का) समुदाय में अपनी ही जाति में शादी करने (endogamy) का कड़ा नियम है, लेकिन वे अपने गोत्र से बाहर शादी (exogamy) करते हैं। देश भर में उनके कई गोत्र फैले हुए हैं, इसलिए इनमें विविधता पाई जाती है। इन सभी उप-समूहों का दर्जा एक समान नहीं है, और उनके संबंधित व्यवसायों के आधार पर उनमें एक पदानुक्रम (ऊँच-नीच का क्रम) होता है। धानुक समुदाय के कुछ लोग अब छोटे ज़मींदार भी हैं। आजीविका के लिए छोटे-मोटे काम करने के कारण, कुछ राज्यों में उन्हें दलित माना जाता है। एक दलित समुदाय के रूप में, उन्हें सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ता है और उनकी बस्तियाँ अक्सर गाँवों से अलग या दूर होती हैं। लेकिन बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में वे OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) के अंतर्गत आते हैं, इसलिए उन्हें ‘साफ़-सुथरे शूद्र’ (clean shudras) के रूप में देखा जाता है।

मान्यताएँ
कुछ जगहों पर ब्राह्मणों को पुजारी के रूप में नियुक्त किया जाता है, जबकि अन्य जगहों पर वे धानुक पुजारियों की सेवा लेते हैं। धानुक जाति जादू-टोने, तंत्र-मंत्र और भूत-प्रेत में विश्वास करती है। वे दो धार्मिक समूहों में बँटे हुए हैं: एक समूह काली की पूजा करता है और उन्हें अपनी ‘कुलदेवी’ मानता है, जबकि दूसरा समूह शीतला माता की पूजा करता है। काली की पूजा करने वाले लोग मांस खाते हैं और शराब या मदिरा का सेवन करते हैं, जबकि शीतला माता के उपासक ऐसा नहीं करते हैं। वे शीतला माता नामक देवी की पूजा करते हैं। धानुक समुदाय का मुख्य पेशा खेती-बाड़ी से जुड़ा काम है और यह बात भारत के सभी राज्यों में लागू होती है।

वितरण (फैलाव)
वर्तमान में धानुक समुदाय के लोग पूरे भारत और नेपाल में रहते हैं। नेपाल में, ये पूर्व में मोरंग से लेकर पश्चिम में तराई तक फैले हुए हैं। लेकिन धनुक समुदाय के लोग पूर्व में सप्तरी, सिराहा और धनुषा में भी पाए जाते हैं। इनके बसने का मुख्य इलाका चुरिया पहाड़ियों के दक्षिण में मैदानी घाटी में सप्तरी से धनुषा तक फैला हुआ है। नेपाल में धनुक अल्पसंख्यक समुदाय की आबादी का सही आंकड़ा बताना मुश्किल है। भारत में, ये पंजाब से लेकर पश्चिम बंगाल तक के बड़े इलाके में पाए जाते हैं।

भाषा
नेपाल में, इनकी भाषा मैथिली और नेपाली है। ये हिंदू धर्म और सीमा पार की भारतीय संस्कृति से प्रभावित हैं।
भारत में, उत्तरी बिहार के धनुक मैथिली बोलते हैं, लेकिन बिहार के अन्य हिस्सों के धनुक अंगिका, भोजपुरी, मगही आदि जैसी अलग-अलग भाषाएँ बोलते हैं। वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोग अवधी, मध्य उत्तर प्रदेश के लोग बुंदेली, कन्नौजी आदि और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोग ब्रज भाषा बोलते हैं। झारखंड में ये अंगिका और संथाली बोलते हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल में ये बंगाली बोलते हैं। हरियाणा में ये हरियाणवी, राजस्थान में राजस्थानी, गुजरात में गुजराती, पंजाब में पंजाबी और मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ में हिंदी बोलते हैं।

Like to share it

Like Us

youtu.be/bEwzJzRgEUE?si=kOyHm1U_l8OH9UM3क्या आपने डॉ. भीमराव अम्बेडकर की प्रसिद्ध पुस्तक “जाति का विनाश” (Annihilation of Caste) पढ़ी है?इस वीडियो में चर्चा होगी:📚 इस वीडियो में क्या जानेंगे?• डॉ. अम्बेडकर की पुस्तक ‘जाति का विनाश’ की पृष्ठभूमि और प्रमुख विचार • जाति व्यवस्था और श्रम विभाजन पर अम्बेडकर का दृष्टिकोण • बहुजन समाज में सामाजिक समानता और आत्मसम्मान का महत्व • धानुक जाति के लिए शिक्षा, इतिहास और सामाजिक नवजागरण की सीख • आत्मसम्मान और जातीय श्रेष्ठता के बीच अंतर • सामाजिक संगठनों में गुटबाजी, नेतृत्व और सामूहिक जिम्मेदारी • आर्थिक स्वावलंबन, महिला सशक्तिकरण और युवा नेतृत्व • ज्योतिराव फुले की ‘गुलामगिरी’ सहित महत्वपूर्ण पुस्तकों का परिचय 📖 इस विषय पर अनुशंसित पुस्तकें1. डॉ. बी. आर. अम्बेडकर — Annihilation of Caste (जाति का विनाश)2. ज्योतिराव फुले — गुलामगिरी3. डॉ. बी. आर. अम्बेडकर — Who Were the Shudras?4. डॉ. बी. आर. अम्बेडकर — The Untouchables5. कांचा इलैया शेफर्ड — Why I Am Not a Hinduwww.youtube.com/watch?v=bEwzJzRgEUE#जातिकाविनाश #DrAmbedkar #DhanukSamaj #धानुकजाति #धानुक #धानुकसमाज ...
View on Facebook (opens in a new tab)
📚 शिक्षा से बदलेगा भविष्य | विचारों की आवाज़ — एपिसोड 2सावित्रीबाई फुले का जीवन हमें सिखाता है कि शिक्षा सामाजिक बदलाव की एक मजबूत नींव है।धानुक जाति की प्रगति के लिए जरूरी है कि हम अपने बच्चों की शिक्षा, युवाओं के कौशल और बेटियों के समान अवसरों को प्राथमिकता दें।आज संकल्प लें—अपनी क्षमता के अनुसार कम-से-कम एक विद्यार्थी की शिक्षा में सहयोग करेंगे।शिक्षा हमारी शक्ति, आत्मनिर्भरता हमारा लक्ष्य और समानता हमारा संकल्प।इसे अपने परिवार, मित्रों और युवाओं के साथ साझा करें।#dhanuksamaj #शिक्षा #सावित्रीबाईफुले #सामाजिकजागरूकता #समानता ...
View on Facebook (opens in a new tab)
लेख - १५ दिनांक: २२ अक्टूबर २०२६शीर्षक: "युवा बेरोजगारी से कौशल और उद्यमिता तक" मैं ऐसे लेख की श्रृंखला लेकर आ रहा हूँ जो 'धानुक समाज के नाम आत्ममंथन' के नाम से होगी। पढ़ने के लिए मुझे फॉलो करें। #शशिधरकुमार #धानुकजाति #धानुकसमाज #धानुक #Dhanuk #dhanuksamaj #धानुक_जाति ...
View on Facebook (opens in a new tab)

Follows Us

पाखण्डी को खदेड़ दिया एक शिक्षित युवक ने ।

इसीलिए बाबा साहब ने कहा था कि शिक्षा वो शेरनी का दूध है जो जितना पिएगा वो उतना दहाड़ेगा।

जय भीम

दिल्ली में बैठे तथाकथित मेन स्ट्रीम मीडिया को शर्म आनी चाहिए कि नॉर्थ ईस्ट का रिजनल मीडिया जिस पुरज़ोर तरीक़े से चीनी घुसपैठ की आवाज़ उठा रहा है, गोदी चैनल उसी पुरज़ोर तरीक़े से लीपापोती में जुटे हैं!

लेख - १५
दिनांक: २२ अक्टूबर २०२६
शीर्षक: "युवा बेरोजगारी से कौशल और उद्यमिता तक"
मैं ऐसे लेख की श्रृंखला लेकर आ रहा हूँ जो 'धानुक समाज के नाम आत्ममंथन' के नाम से होगी। पढ़ने के लिए मुझे फॉलो करें। #शशिधरकुमार #धानुकजाति #धानुकसमाज #धानुक #Dhanuk #dhanuksamaj #धानुक_जाति

3

दूध बहा दो, मूत्र पी लो, गज़ब का सिस्टम बनाया है

Follow Us

Youtube Feeds

Instagram Feeds